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उत्तराखंड में संस्कृत भाषा के उत्थान के लिए उच्चस्तरीय आयोग बनेगा: मुख्यमंत्री धामी

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार में अंतर्राष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में संस्कृत के उत्थान के लिए उच्चस्तरीय आयोग बनाने की घोषणा की। उन्होंने संस्कृत को सभी भाषाओं की जननी बताया और एसआईआर का विरोध कर रहे विपक्ष पर निशाना साधा।

हरिद्वार: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड में संस्कृत भाषा के विकास और उत्थान के लिए एक बड़ा कदम उठाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि राज्य में संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए एक उच्चस्तरीय आयोग का गठन किया जाएगा। मुख्यमंत्री धामी ने यह घोषणा सोमवार को हरिद्वार में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित करते हुए की। उन्होंने जोर देकर कहा कि संस्कृत के आधार पर ही मानव सभ्यताओं का विकास संभव हुआ है।

संस्कृत का महत्व और सनातन संस्कृति

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में संस्कृत के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि विश्व की अधिकतर भाषाओं की जड़ें किसी न किसी रूप में संस्कृत से ही जुड़ी हुई हैं, इसलिए इसे सभी भाषाओं की जननी माना जाता है। उन्होंने सनातन संस्कृति के इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया कि समस्त वेद, पुराण और उपनिषदों की रचना भी संस्कृत में ही की गई है। धामी ने संस्कृत को अनादि और अनंत भाषा बताते हुए इसके संरक्षण और प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया।

अर्द्धकुंभ और विपक्ष पर टिप्पणी

सम्मेलन के दौरान, मुख्यमंत्री ने अर्द्धकुंभ-2027 को दिव्य और भव्य बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया और सभी से इस सनातन संस्कृति के आयोजन से जुड़ने का आह्वान किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने राजनीतिक दलों पर भी निशाना साधा। सीएम ने कहा कि कुछ दल सिर्फ विरोध करने की मानसिकता रखते हैं और वे देश में शुरू किए गए अच्छे और सार्थक प्रयासों, जैसे कि एसआईआर (वोटर लिस्ट सत्यापन), का भी बिना वजह विरोध करते हैं।

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