नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत ने बुधवार को चुनाव आयोग (ECI) की वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर बड़ा फैसला सुनाया।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया Surya Kant और जस्टिस Joymalya Bagchi की पीठ ने स्पष्ट कहा कि SIR प्रक्रिया में कोई कानूनी खामी नहीं है और यह चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग को वोटर लिस्ट के सत्यापन और संशोधन का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है तथा इस प्रक्रिया के जरिए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित किए जा सकते हैं।
कोर्ट ने यह भी माना कि आयोग के पास किसी व्यक्ति को मतदाता सूची में शामिल करने से इंकार करने का अधिकार भी है, बशर्ते पूरी प्रक्रिया कानून के अनुरूप हो।
पीठ ने अपने फैसले में कहा कि चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया के दौरान सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया है और यह प्रक्रिया देशभर में जारी रह सकेगी। अदालत ने दोहराया कि लोकतंत्र में “फ्री एंड फेयर इलेक्शन” सर्वोच्च प्राथमिकता है।
यह मामला उस समय चर्चा में आया था जब चुनाव आयोग ने कुछ राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की शुरुआत की थी। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 326, रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट 1950 और संबंधित नियमों के तहत आयोग को मिली शक्तियों से आगे जाती है।
विवाद का मुख्य बिंदु यह था कि जिन मतदाताओं के नाम 2002 या कुछ राज्यों में 2003 की वोटर लिस्ट में नहीं थे, उन्हें अपने पूर्वजों का लिंक साबित करने के लिए दस्तावेज प्रस्तुत करने की जरूरत बताई गई थी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि इससे गरीब, पिछड़े और प्रवासी समुदायों के वास्तविक मतदाता प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि उनके पास पुराने रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पारदर्शिता बढ़ाने और मतदाताओं की परेशानियां कम करने के लिए कई अंतरिम निर्देश भी दिए थे। चुनाव आयोग ने शुरुआत में सत्यापन के लिए 11 दस्तावेजों को मान्यता दी थी, लेकिन बाद में अदालत ने आधार कार्ड को भी अतिरिक्त दस्तावेज के रूप में स्वीकार करने का निर्देश दिया।
ज्यादातर याचिकाएं पिछले वर्ष जून में दायर की गई थीं, जब चुनाव आयोग ने बिहार में SIR प्रक्रिया लागू करने का निर्णय लिया था। इसके बाद इस प्रक्रिया को पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु सहित कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक विस्तारित किया गया।
चुनाव आयोग ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना और डुप्लीकेट या अयोग्य मतदाताओं को हटाना है। सभी पक्षों की लंबी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे आज सुनाया गया।











