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उत्तराखंड में 89 मदरसों पर बंदी की तलवार, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने शासन से की सिफारिश

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देहरादून: उत्तराखंड में मदरसों के शिक्षा विभाग में पंजीकरण को लेकर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने कार्रवाई तेज कर दी है। पंजीकरण की अंतिम तिथि 30 सितंबर नजदीक आने के बीच प्राधिकरण ने अब तक पंजीकरण के लिए आगे नहीं आने वाले 89 मदरसों को बंद करने की शासन से सिफारिश की है। इन मदरसों का संचालन अवैध मानते हुए नियमानुसार तालाबंदी की कार्रवाई की जा सकती है।

प्राधिकरण के अनुसार, प्रदेश में चिन्हित 452 मदरसों में से अब तक 200 मदरसों ने मान्यता के लिए पोर्टल पर पंजीकरण कराया है। वहीं, 34 मदरसों को अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थान के रूप में प्रमाण पत्र प्रदान किए जा चुके हैं। इन प्रमाण पत्रों का वितरण मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा किया गया है।

21 अवैध मदरसे पहले ही सील

शासन की ओर से देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जिलों में संचालित 21 अवैध मदरसों को पहले ही सील किया जा चुका है। इसके अलावा, देहरादून समेत कुल 108 मदरसों ने स्वयं संस्थान बंद करने के संबंध में शासन को पत्र सौंपा है। इनमें अकेले 104 मदरसे हरिद्वार जिले के हैं।

89 मदरसों का नहीं मिला पंजीकरण रिकॉर्ड

अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के मुताबिक, प्रदेश में चिन्हित 452 मदरसों में से 363 मदरसे या तो बंद हो चुके हैं, मान्यता प्राप्त कर चुके हैं अथवा पंजीकरण की प्रक्रिया में हैं। शेष 89 मदरसों के संबंध में पंजीकरण का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है। ऐसे में इन संस्थानों को अवैध रूप से संचालित मानते हुए बंद करने की सिफारिश की गई है।

अक्टूबर तक 100 मदरसों को प्रमाण पत्र देने की तैयारी

प्राधिकरण को उम्मीद है कि अक्टूबर के अंत तक करीब 100 मदरसों को अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थान का प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा। इसके लिए संबंधित मदरसों के भूमि संबंधी दस्तावेजों और अन्य आवश्यक प्रमाण पत्रों की जांच अंतिम चरण में है। नियमों के अनुरूप पाए जाने वाले संस्थानों को जांच पूरी होने के बाद प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे।

मान्यता प्राप्त मदरसों को मिलेगा मध्याह्न भोजन का लाभ

उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के चेयरमैन डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने बताया कि जिन मान्यता प्राप्त मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक संस्थानों में कक्षा एक से आठ तक पढ़ाई हो रही है, उन्हें प्रधानमंत्री पोषण योजना (पीएम पोषण) से जोड़ा जाएगा। शिक्षा विभाग की जांच पूरी होने के बाद इस संबंध में आवश्यक प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

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