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UKSSSC पेपर लीक मामले में CBI ने की पहली गिरफ्तारी:टिहरी की सहायक प्रोफेसर को पकड़ा, अब तक तीन लोग हो चुके गिरफ्तार

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उत्तराखंड में UKSSSC पेपर लीक मामले में सीबीआई ने शहीद हंसा धनई राजकीय महाविद्यालय, अगरोरा (धार मंडल), टिहरी गढ़वाल की एक सहायक प्रोफेसर सुमन को गिरफ्तार किया है। आरोपी पहले से ही गिरफ्तार दो लोगों से की गई पूछताछ के बाद पकड़ी गई है।

सीबीआई ने पहले से गिरफ्तार दोनों लोगों से गहन पूछताछ की और मोबाइल फोन के साथ दूसरे सबूतों को जांचा, जिसमें इस प्रोफेसर की भूमिका सामने आई। आरोपी को मेडिकल परीक्षण के बाद अदालत में पेश किया जाएगा।

अब तक की जांच से पता चला है कि सुमन ने परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र के एक हिस्से को हल करने में साबिया की मदद की थी और परीक्षा में उपस्थित खालिद को उसका हल भेजा था।

पेपर लीक के बाद छात्र धरने पर बैठे तो सीएम खुद उनके बीच गए थे और केस को सीबीआई को सौंपने की बात कही थी।

पुलिस को पहले से ही था सुमन पर शक जांच में ये पहले ही सामने आ चुका है कि हरिद्वार के जिस केंद्र में खालिद परीक्षा दे रहा था, उस केंद्र में कुल 18 कमरे थे, केंद्र में परीक्षा के लिए कुल 15 जैमर लगे थे, लेकिन कमरा नंबर 9, 17 और 18 में जैमर नहीं लगे हुए थे। वहीं, कमरा नंबर 9 में खालिद परीक्षा दे रहा था। इसी कमरे से बैठकर खालिद ने किसी डिवाइस से परीक्षा के तीन पेज अपनी बहन साबिया को भेजे थे और साबिया ने प्रोफेसर सुमन चौहान को भेजे थे। 5 पॉइंट में समझिए पेपर लीक मामले में अबतक क्या हुआ…

1. 21 सितंबर को UKSSSC ने ग्रेजुएट लेवल की परीक्षा कराई: UKSSSC ने 21 सितंबर को ग्रेजुएट लेवल की भर्ती के लिए 11 बजे एग्जाम शुरू​​​​ किया। एग्जाम 1 बजे तक होना था। लेकिन 11:30 बजे ही पेपर लीक हो गया, जिसके तीन पन्ने वॉट्सऐप से बाहर आ गए थे।

आरोपी खालिद मलिक नाम के व्यक्ति ने असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन को अपने पेपर भेजे दिए थे, जिसमें खालिद की बहन साबिया भी शामिल थी। फिलहाल खालिद और उसकी बहन साबिया न्यायिक हिरासत में हैं।

बॉबी पवार ने ये स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर शेयर किया था।

2. प्रदेश भर में शुरू हुआ आन्दोलन- इसके बाद प्रदेश भर में आंदोलन शुरू हो गया। काफी लंबे समय तक बेरोजगार संगठन के लोग देहरादून के परेड ग्राउंड के बाहर धरने पर बैठे रहे। फिर सीएम पुष्कर सिंह धामी लगभग 8 दिन के बाद छात्रों से मिलने उनके धरना स्थल पर पहुंचे थे और उन्होंने सीबीआई जांच की बात कही।

इसके बाद सीबीआई जांच के लिए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को लिख दिया था। छात्रों ने दूसरी मांग अपनी की थी कि इस परीक्षा को रद्द किया जाए और उसका रोस्टर दोबारा से जारी किया जाए।

3. एकल सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया- छात्रों के बढ़ने प्रदर्शन को देखते हुए सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एकल सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया, जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) यूसी ध्यानी को सौंपी गई। इस आयोग को परीक्षा में हुई अनियमितताओं, पेपर लीक की प्रक्रिया, शामिल अधिकारियों और बाहरी नेटवर्क की भूमिका की जांच का अधिकार दिया गया था।

आयोग ने प्रदेश के कई जिलों में जाकर छात्रों, अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से जनसंवाद किया और उन्हीं बयानों के आधार पर अपनी अंतरिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंपी।

4- सरकार ने आयोग को सौंपी रिपोर्ट, पेपर रद्द- छात्रों की मांग थी कि इस मामले की जांच सीबीआई से करवाई जाए और परीक्षा को रद्द किया जाए। एकल सदस्यीय जांच आयोग की कई बैठकों में भी छात्रों ने इन मांगों को उठाया था। वहीं, जब आयोग ने रिपोर्ट सीएम धामी को सौंपी तो इसके कुछ ही घंटों बाद सरकार ने ये रिपोर्ट यूकेएसएसएसी को सौंपी। और फिर इस रिपोर्ट के आधार पर ही यूकेएसएसएसी ने परीक्षा को रद्द कर दिया था।

5- CBI की एंट्री, FIR में 4 नाम: सीबीआई ने 28 अक्टूबर 2025 को जांच की कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए हैंडओवर लिया। सीबीआई ने सबसे पहले देहरादून की एंटी करप्शन शाखा में एफआईआर दर्ज की। जिसमें चार आरोपी खालिद, सुमन, सबिया, और हीना के नाम दर्ज किया गया। इसके बाद से लगातार सीबीआई मामले की जांच में जुटी हुई है , सीबीआई ने हरिद्वार के उस सेंटर की भी जांच की थी जहां से प्रश्न पत्र आउट हुआ था।

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