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आयरन-स्टील फर्मों पर छापेमारी: 6 दिन की जांच के बाद जमा हुए 2.1 करोड़ रुपये

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देहरादून:

राज्य कर (स्टेट जीएसटी) विभाग ने हरिद्वार की आयरन और स्टील फर्मों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी का भंडाफोड़ किया है। स्टील फर्में स्टॉक छिपाकर अपनी कर देयता को शून्य या नगण्य दर्शा रही थीं। करीब 06 दिन चली जांच के बाद स्टील फर्मों ने 2.1 करोड़ रुपए मौके पर ही जमा करा दिए हैं। मौके से बड़ी संख्या में कब्जे में लिए गए दस्तावेजों का जांच अभी गतिमान है। जिससे कर देयता का आंकड़ा ऊपर जा सकता है।

प्रदेश के राजस्व में बढ़ोतरी के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कर चोरी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में आयुक्त राज्य कर सोनिका ने आयरन और स्टील फर्मों में कर चोरी की सूचना पर अपर आयुक्त पीएस डुंगरियाल, संयुक्त आयुक्त संजीव सोलंकी और राजेंद्र लाल वर्मा कार्रवाई के लिए निर्देशित किया था।

विभाग की जांच में सामने आया कि आयरन और स्टील फर्में इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) का अनुचित लाभ उठा रही हैं, जबकि उन पर अच्छा खास टैक्स बन रहा है। जिसके बाद हरिद्वार के लक्सर क्षेत्र की तीन फर्मों पर छापेमारी की गई। 30 अधिकारियों और कार्मिकों की टीम ने छह दिन तक फर्मों के रिकार्ड खंगाले। साथ ही तैयार और कच्चे माल का सघन परीक्षण किया।

घोषित स्टॉक से कहीं अधिक मिला कच्चा और तैयार माल
पता चला कि जितना स्टाक फर्मों ने घोषित किया है, मौके पर उससे कहीं अधिक स्टाक है। जीएसटी अधिकारियों ने फर्मों के तमाम दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए। जिनका गहन परीक्षण विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा से कराया जाएगा। ताकि अब तक की गई कर चोरी की पाई-पाई वसूल की जा सके। हालांकि, खुद को घिरता देख फर्मों ने मौके पर ही 2.1 करोड़ रुपए जमा करा दिए। शेष वसूली विस्तृत जांच के बाद की जाएगी। कार्रवाई करने वाली टीम में उपायुक्त दीपक कुमार, मनीषा सैनी, कार्तिकेय वर्मा आदि शामिल रहे।

आयुक्त राज्य कर (उत्तराखंड) सोनिका ने कहा कि कर चोरी किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह अभियान निरंतर जारी रहेगी। इसके लिए सेक्टरवार फर्मों को चिह्नित किया जा रहा है। जरूरत पड़ी तो विधिक कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी। लिहाजा, सभी प्रतिष्ठान तय कर को समय पर जमा कराना सुनिश्चित करें।

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