Home उत्तराखंड PM मोदी विजिट + एक्सप्रेसवे: डाट काली मंदिर को मिलेगी राष्ट्रीय पहचान

PM मोदी विजिट + एक्सप्रेसवे: डाट काली मंदिर को मिलेगी राष्ट्रीय पहचान

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देहरादून। उत्तराखंड-उत्तर प्रदेश की सीमा पर देहरादून के प्रवेश पर स्थित प्राचीन सिद्धपीठ मां डाट काली मंदिर अब धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभरने की दहलीज पर खड़ा है।

वर्षों से देहरादून, विकासनगर, सहारनपुर, हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा यह मंदिर अब राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान पाने जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का शुरू होना और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के यहां दर्शन-पूजन को लेकर बढ़ी राष्ट्रीय चर्चा है।

दिल्ली से देहरादून की यात्रा को तेज और सुगम बनाने वाला एक्सप्रेसवे जैसे ही पूर्ण रूप से संचालित होगा, वैसे ही राजधानी और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों से आने वाले यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। इसका सीधा लाभ डाट काली मंदिर को मिलेगा, क्योंकि यह मार्ग पर स्थित पहला प्रमुख धार्मिक पड़ाव है।

दिल्ली एक्सप्रेसवे शुरू होने से मंदिर क्षेत्र में बढ़ती भीड़ के साथ पार्किंग, प्रसाद, धार्मिक सामग्री, भोजनालय, शौचालय, पेयजल व स्थानीय परिवहन जैसी सुविधाओं की मांग बढ़ेगी। इससे आसपास के युवाओं के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा होंगे। पर्यटन विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि मंदिर क्षेत्र का योजनाबद्ध विकास किया जाए तो यह दून के धार्मिक पर्यटन मानचित्र का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

यात्रा शुरू करने से पहले माता के दर्शन की परंपरा

स्थानीय मान्यता के अनुसार मां डाट काली के दर्शन के बिना पहाड़ की यात्रा अधूरी मानी जाती है। वर्षों से देहरादून में प्रवेश करने वाले वाहन यहां रुकते हैं और सुरक्षित यात्रा की कामना करते हैं। यही कारण है कि यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि यात्रियों की मनोवैज्ञानिक आस्था का भी केंद्र बना हुआ है। यहां से मेरठ, दिल्ली की ओर जाने वाले श्रद्धालु भी अकसर यहां रुककर माथा टेककर गुजरते हैं।

प्रधानमंत्री का आगमन दिलाएगा राष्ट्रीय पहचान

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना की संभावना ने इस सिद्धपीठ को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है। प्रधानमंत्री जिस धार्मिक स्थल पर जाते हैं, वहां देशभर का ध्यान स्वतः केंद्रित हो जाता है। ऐसे में डाट काली मंदिर का नाम उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों की सूची में और मजबूती से दर्ज होने की संभावना मानी जा रही है।

चारधाम मार्ग का भी बन सकता है नया पड़ाव

चारधाम यात्रा, मसूरी, ऋषिकेश और हरिद्वार आने वाले श्रद्धालु यदि डाट काली मंदिर को यात्रा के प्रारंभिक पड़ाव के रूप में अपनाते हैं तो यहां धार्मिक पर्यटन का नया प्रवाह बन सकता है। इससे स्थानीय दुकानों, प्रसाद विक्रेताओं, फूल व्यवसायियों, भोजनालयों और छोटे कारोबारियों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।

विश्व पटल पर उत्तराखंड की नई धार्मिक पहचान

उत्तराखंड पहले ही केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री धाम, हेमकुंड साहिब समेत हरकी पैड़ी हरिद्वार जैसे तीर्थों से वैश्विक धार्मिक पहचान रखता है। डाट काली मंदिर इस श्रृंखला में एक नए शहरी धार्मिक प्रवेशद्वार के रूप में उभर सकता है, जहां आस्था और आधुनिक संपर्क दोनों साथ दिखाई देंगे।

आस्था, इतिहास और सुरंग से जुड़ी अनोखी मान्यता

मां डाट काली मंदिर देहरादून की सीमा पर स्थित यह सिद्धपीठ लंबे समय से यात्रियों, सेना के जवानों और स्थानीय लोगों की गहरी आस्था का केंद्र रहा है। स्थानीय जनश्रुति के अनुसार जब इस मार्ग पर सुरंग निर्माण का कार्य चल रहा था, तब निर्माण में लगातार बाधाएं आ रही थीं। इसके बाद माता की पूजा-अर्चना की गई और तभी कार्य सुचारु रूप से आगे बढ़ पाया। तभी से यह स्थल यात्रियों के लिए विशेष आस्था का केंद्र माना जाता है।

पुरानी टनल से आज भी जुड़ी श्रद्धा

मंदिर के निकट पुरानी टनल आज भी सुरक्षित रखी गई है और मंदिर पहुंचने के पारंपरिक मार्ग के रूप में इसका महत्व बना हुआ है। नई सड़क व्यवस्था बनने के बावजूद श्रद्धालुओं के लिए यह मार्ग भावनात्मक रूप से विशेष माना जाता है। माना जाता है कि मां डाट काली यात्रा की रक्षा करती हैं।

नया वयाडक्ट बना तीर्थयात्रियों के लिए राहत मार्ग

मंदिर तक पहुंच अब पहले से अधिक आसान और सुरक्षित हो गई है। एक्सप्रेसवे परियोजना के तहत मंदिर के पास लगभग 1.3 किमी लंबा नया वयाडक्ट (ऊंचा मार्ग) तैयार किया गया है, जिस पर लगभग 26 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इससे दिल्ली-सहारनपुर की ओर से आने वाले वाहनों को अब यू-टर्न लेकर वापस नहीं आना पड़ेगा और वह सीधे मंदिर तक पहुंचेगे।

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