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उत्तराखंड में मदरसों पर सख्ती, बिना पंजीकरण जुलाई के बाद नहीं चलेंगे संस्थान

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जुलाई माह से पूर्व मदरसों को नए पंजीकरण की प्रकिया से गुजरना है,जिनका पंजीकरण नहीं होगा वो बंद करा दिए जायेंगे: अल्पसंख्यक सचिव

हरिद्वार:यूपी से लगते हरिद्वार जिले में चल रहे मदरसों को लेकर एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है।

धामी सरकार के निर्देश पर डीएम मयूर दीक्षित द्वारा कराए गए सत्यापन अभियान में 11 हजार से अधिक बच्चों का रिकॉर्ड नहीं मिला.इन बच्चों के नाम पर मदरसा इंतजामिया कमेटी के संचालक सरकार से फंडिंग ले रहे थे.

जनपद हरिद्वार में 131 मदरसे ऐसे है जोकि मदरसा बोर्ड से पंजीकृत होकर संचालित हो रहे थे। यहां पढ़ने वाले बच्चों के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा अल्पसंख्यक कोटे से तमाम सुविधाएं प्राप्त होती रही है, जिनमें “मिड डे मील” भी शामिल है। जानकारी के अनुसार यहां तकरीबन 31 हजार बच्चों का पढ़ना बोर्ड रिकॉर्ड मे दिखाया गया है। इस संख्या पर राज्य की धामी सरकार को संदेह थी, जिस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिला प्रशासन को गहनता से सत्यापन किए जाने के निर्देश दिए.

डीएम के निर्देश पर एक साथ छापे

जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि सरकार के निर्देशों के क्रम में जिला प्रशासन ने एक साथ कई मदरसों पर गहनता से सत्यापन का कार्य शुरू कराया, मात्र एक महीने में मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 31000 से 19400 पर आ गई है l कई मदरसों ने बंद करने की एप्लीकेशन दे चुके हैं।

जिलाधिकारी दीक्षित ने बताया कि जिन मदरसों में बच्चों की संख्या में मिड डे मिल की संख्या से मिलान नहीं हुआ ये गड़बड़ी पाई गई है उनके खिलाफ जिला प्रशासन रिकवरी की कार्यवाही करेगा.

क्या कहते है अल्पसंख्यक सचिव

उत्तराखंड अल्पसंख्यक विभाग के विशेष सचिव डा. पराग मधुकर धकाते का कहना है कि शासन के पास ऐसी शिकायतें आई थी कि मदरसों में बच्चों की संख्या फर्जी दर्शायी जा रही है। जिस पर मुख्यमंत्री ने जांच पड़ताल के निर्देश दिए थे और ये शिकायत हरिद्वार जिले में सही निकली है,ऐसे ही अन्य जिलों में भी सत्यापन कराया जा रहा है. जुलाई माह से पूर्व मदरसों को नए पंजीकरण की प्रकिया से गुजरना है, जिनका पंजीकरण नहीं होगा वो बंद करा दिए जायेंगे।

मदरसा बोर्ड खत्म

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 1 जुलाई से मदरसा बोर्ड खत्म करके उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन को मंजूरी दी हुई है। जुलाई माह से मदरसों को और अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं को इस बोर्ड के साथ साथ उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से भी अनुमति लेना आवश्यक हो जाएगा।

सीएम धामी ने कहा है कि एक देश एक शिक्षा की तरफ राज्य सरकार बढ़ रही है सभी बच्चों को एक जैसी शिक्षा मिले ऐसा सरकार का प्रयास है। इसमें मुस्लिम ईसाई सिख पारसी बौद्ध जैन शिक्षा संस्थान को भी बराबर की सरकार से सहायता मिलेगी।

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