Home उत्तराखंड बदरीनाथ चढ़ावा चोरी प्रकरण में आरोपी प्रमोद नौटियाल को हाईकोर्ट से मिली...

बदरीनाथ चढ़ावा चोरी प्रकरण में आरोपी प्रमोद नौटियाल को हाईकोर्ट से मिली जमानत, 6 नवंबर को अदालत ने सुनाया फैसला

0

नैनीताल: बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की रकम और बहुमूल्य भेंट सामग्री में कथित हेराफेरी से जुड़े मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने आरोपी प्रमोद नौटियाल को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने 6 नवंबर को उनकी जमानत याचिका मंजूर कर ली। न्यायमूर्ति आलोक महरा की पीठ ने जमानत आवेदन स्वीकार करते हुए आरोपी को व्यक्तिगत बंधपत्र और समान राशि के दो विश्वसनीय जमानतियों के आधार पर रिहा करने के आदेश दिए।

अदालत ने जमानत के साथ कई शर्तें भी निर्धारित की हैं। आरोपी मामले से जुड़े किसी भी व्यक्ति को धमकाने या प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेगा और न ही साक्ष्यों से छेड़छाड़ करेगा। इसके अलावा उसे जांच एवं न्यायिक सुनवाई में सहयोग करना होगा तथा अदालत की अनुमति के बिना देश छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। इन शर्तों का उल्लंघन होने पर अभियोजन पक्ष जमानत निरस्त कराने के लिए अदालत में आवेदन कर सकेगा।

क्या है बदरीनाथ धाम चढ़ावा चोरी का मामला?

बदरीनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाई गई नकदी, सोने-चांदी के सिक्कों और अन्य बहुमूल्य भेंट सामग्री की गणना के दौरान कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया था। जांच के दौरान मंदिर समिति के तत्कालीन प्रोटोकॉल अधिकारी प्रमोद नौटियाल, सेवानिवृत्त मंदिर अधिकारी राजेंद्र सिंह चौहान और सुरक्षा कर्मी मनोज कुमार के नाम सामने आए थे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मंदिर समिति ने आंतरिक जांच शुरू की, जबकि शासन ने उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की। बाद में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर एसआईटी को जांच की जिम्मेदारी सौंपी।

जुलाई में हुई थी गिरफ्तारी, अक्टूबर में दाखिल हुई चार्जशीट

इस प्रकरण में 2 जुलाई 2026 को चढ़ावे की गणना के दौरान कथित अनियमितता का मामला सामने आया। 3 जुलाई को शिकायत के बाद मंदिर समिति ने जांच शुरू करते हुए प्रमोद नौटियाल को नोटिस जारी किया। 6 जुलाई को उन्हें निलंबित कर दिया गया और शासन ने उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की।

8 जुलाई को बदरीनाथ थाने में एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद 12 जुलाई को एसआईटी ने प्रमोद नौटियाल को देहरादून से गिरफ्तार किया, जबकि 17 जुलाई को राजेंद्र सिंह चौहान की गिरफ्तारी हुई।

25 जुलाई को जिला एवं सत्र न्यायालय ने प्रमोद नौटियाल की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद 9 अक्टूबर को एसआईटी ने करीब एक हजार पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की, जिसमें 50 गवाहों का उल्लेख किया गया। अदालत ने तीनों आरोपियों के खिलाफ संज्ञान लिया।

नकदी, सोने-चांदी के सिक्कों और अन्य भेंट सामग्री में हेराफेरी का आरोप

एसआईटी की जांच में आरोप लगाया गया कि मंदिर में चढ़ावे की गणना के दौरान नकदी, सोने-चांदी के सिक्के, आभूषण, शालिग्राम शिला और केसर के पैकेट सहित अन्य भेंट सामग्री को कथित रूप से हटाया गया।

पुलिस के अनुसार, 22, 25 और 29 जून को चढ़ावे की गणना के दौरान सामने आए सीसीटीवी फुटेज में राजेंद्र सिंह चौहान की संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दी थीं। जांच में प्रमोद नौटियाल और राजेंद्र सिंह चौहान के बीच कथित मिलीभगत का आरोप भी लगाया गया है।

एसआईटी ने प्रमोद नौटियाल और राजेंद्र सिंह चौहान के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 306, 316(5), 317(2) और 61(2) के तहत आरोपपत्र दाखिल किया है। वहीं, मनोज कुमार के खिलाफ धारा 305 और 317(2) के तहत कार्रवाई की गई है।

हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद अब प्रमोद नौटियाल को निर्धारित कानूनी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। हालांकि, जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से दोषमुक्त होना नहीं है। मामले में आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक सुनवाई के बाद ही होगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here
Captcha verification failed!
CAPTCHA user score failed. Please contact us!