25 सितंबर को प्रस्तावित हैं साक्षात्कार, 2024 की भर्ती व्यवस्था से 2026 के विज्ञापन में बड़ा बदलाव
देहरादून। वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (VMSB-UTU) के परिसर संस्थानों में निदेशक पदों पर भर्ती को लेकर वर्ष 2026 में जारी विज्ञापन सवालों के घेरे में है। इस बार निदेशक पदों को ‘On Deputation Basis’ पर भरे जाने का प्रावधान किया गया है। इन पदों के लिए 25 सितंबर 2026 को साक्षात्कार प्रस्तावित हैं। भर्ती प्रक्रिया में किए गए बदलाव को लेकर विश्वविद्यालय के लागू नियमों, पात्रता मानकों और सक्षम स्वीकृति की स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठ रही है।
2024 में संविदा के आधार पर थी भर्ती
उपलब्ध विश्वविद्यालयीय भर्ती दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2024 में जारी निदेशक पदों के विज्ञापन में नियुक्ति को ‘Contractual in nature’ बताया गया था। विज्ञापन में तीन वर्ष के कार्यकाल, AICTE के 1 मार्च 2019 के विनियमों के अनुरूप शैक्षणिक योग्यता एवं अनुभव तथा अधिकतम 57 वर्ष की आयु सीमा निर्धारित की गई थी।
वर्ष 2023 और 2024 की भर्ती प्रक्रियाओं में AICTE के निर्धारित मानकों को आधार बनाया गया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन भर्तियों में निजी एवं राजकीय संस्थानों से संबंधित पात्र अभ्यर्थियों को आवेदन का अवसर दिया गया था। उस समय भर्ती को केवल प्रतिनियुक्ति (Deputation) तक सीमित नहीं किया गया था।
2026 के विज्ञापन में बदली पात्रता व्यवस्था
वर्ष 2026 के विज्ञापन में निदेशक पदों को ‘On Deputation Basis’ पर भरे जाने का उल्लेख किया गया है। इसमें केंद्र या राज्य सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU), सरकारी विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों अथवा मान्यता प्राप्त शोध संस्थानों में कार्यरत प्रोफेसरों के लिए अतिरिक्त पात्रता शर्तें निर्धारित की गई हैं।
भर्ती प्रक्रिया में किए गए इस बदलाव को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि निदेशक पदों को केवल प्रतिनियुक्ति के आधार पर भरने का निर्णय विश्वविद्यालय के किस लागू अधिनियम, Regulation, Recruitment Rule अथवा सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के तहत लिया गया है।
अधिनियम और विनियमों के आधार पर स्पष्टीकरण की मांग
VMSB उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2005 की धारा 30 और 31 में विनियम (Regulations) बनाए जाने तथा विश्वविद्यालय के अधिकारियों की नियुक्ति से संबंधित विषयों को विनियमों के माध्यम से निर्धारित करने का प्रावधान बताया गया है।
ऐसे में भर्ती प्रक्रिया में बदलाव को लेकर यह जानना महत्वपूर्ण हो जाता है कि क्या वर्ष 2026 में ‘Deputation-only’ व्यवस्था लागू करने के लिए कोई नया विनियम, संशोधित भर्ती नियम, शासनादेश अथवा सक्षम निकाय की पूर्व स्वीकृति जारी की गई है।
उपलब्ध विश्वविद्यालयीय Regulations एवं Rules की सामग्री में निदेशक पदों को अनिवार्य रूप से केवल प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरने का स्पष्ट प्रावधान सामने नहीं आने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम स्थिति संबंधित नियमों, अधिसूचनाओं और स्वीकृति पत्रावली की आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
Deputation और Contractual नियुक्ति के बीच स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत
वर्ष 2026 के विज्ञापन में नियुक्ति को ‘On Deputation Basis’ के साथ-साथ ‘Contractual in nature’ भी बताया गया है। ऐसे में प्रतिनियुक्ति और संविदा नियुक्ति के बीच लागू वैधानिक प्रावधानों, नियुक्ति की शर्तों और कार्यकाल की स्थिति को स्पष्ट किए जाने की आवश्यकता बताई जा रही है।
इसके अलावा, वर्ष 2024 में निर्धारित अधिकतम 57 वर्ष की आयु सीमा को वर्ष 2026 के विज्ञापन में घटाकर 55 वर्ष किया गया है। आयु सीमा में किए गए इस बदलाव के आधार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
25 सितंबर को प्रस्तावित साक्षात्कार पर निगाहें
निदेशक पदों के लिए 25 सितंबर 2026 को प्रस्तावित साक्षात्कार के मद्देनजर भर्ती प्रक्रिया में किए गए बदलावों की वैधानिकता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि साक्षात्कार और आगे की प्रक्रिया से पहले संबंधित अधिनियम, विनियमों, भर्ती नियमों तथा सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जानी चाहिए।
यदि भर्ती व्यवस्था में बदलाव के लिए आवश्यक वैधानिक प्रावधान अथवा सक्षम स्वीकृति उपलब्ध नहीं है, तो प्रस्तावित साक्षात्कार और आगे की भर्ती प्रक्रिया पर पुनर्विचार किए जाने की मांग उठ रही है।
तुलनात्मक परीक्षण से स्पष्ट हो सकती है स्थिति
वर्ष 2023, 2024 और 2026 में जारी निदेशक भर्ती विज्ञापनों, संबंधित नियमों, विनियमों और स्वीकृति पत्रावली का तुलनात्मक परीक्षण भर्ती प्रक्रिया में किए गए बदलावों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में मदद कर सकता है।
यह मामला किसी व्यक्ति विशेष की नियुक्ति के बजाय निदेशक पदों पर भर्ती में वैधानिक प्रक्रिया, पारदर्शिता और समान अवसर से जुड़ा हुआ है। ऐसे में विश्वविद्यालय की ओर से भर्ती व्यवस्था में किए गए बदलावों के आधार और संबंधित नियमों पर आधिकारिक स्पष्टीकरण दिए जाने की अपेक्षा की जा रही है।











