देहरादून में बढ़ती पार्किंग समस्या को दूर करने के लिए परेड ग्राउंड और सचिवालय में अंडरग्राउंड पार्किंग परियोजनाओं को गति दी जाएगी। मुख्य सचिव ने डबल बेसमेंट, अधिक पार्किंग क्षमता और राजपुर रोड पर एलिवेटेड पार्किंग का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दि
देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बढ़ते वाहनों और पार्किंग संकट को देखते हुए सरकार ने बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। परेड ग्राउंड और सचिवालय परिसर में प्रस्तावित अंडरग्राउंड पार्किंग परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों से कहा कि पार्किंग परियोजनाओं की योजना भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार की जाए, ताकि आने वाले वर्षों में भी शहर को पर्याप्त पार्किंग सुविधा मिल सके। बैठक में परेड ग्राउंड के नीचे प्रस्तावित अंडरग्राउंड पार्किंग के डिजाइन पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि पार्किंग निर्माण के साथ परेड ग्राउंड और गांधी पार्क को बिना किसी नए स्थायी निर्माण के एक बड़े खुले ग्रीन स्पेस के रूप में विकसित किया जाए। इससे पार्किंग सुविधा बढ़ने के साथ-साथ शहर को बेहतर सार्वजनिक खुला क्षेत्र भी मिलेगा।
डबल बेसमेंट पार्किंग पर भी विचार
अधिकारियों को पार्किंग क्षमता बढ़ाने के लिए डबल बेसमेंट विकल्प पर भी काम करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा पार्किंग में पर्याप्त एंट्री और एग्जिट गेट बनाए जाने पर जोर दिया गया, ताकि वाहनों की आवाजाही सुगम रहे और किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी सुनिश्चित की जा सके।
समीक्षा बैठक में सचिवालय परिसर में प्रस्तावित अंडरग्राउंड पार्किंग के डिजाइन पर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने कहा कि राजधानी में लगातार बढ़ रहे यातायात दबाव को देखते हुए सचिवालय परिसर में पर्याप्त पार्किंग क्षमता विकसित करना आवश्यक है, जिससे कर्मचारियों और आम नागरिकों दोनों को सुविधा मिल सके।
राजपुर रोड पर एलिवेटेड पार्किंग की तैयारी
बैठक के दौरान अधिकारियों को राजपुर रोड पर एलिवेटेड पार्किंग की संभावनाओं का विस्तृत डिजाइन तैयार कर जल्द प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए। यदि यह योजना साकार होती है तो शहर के सबसे व्यस्त क्षेत्रों में पार्किंग की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि इन परियोजनाओं को अलग-अलग नहीं बल्कि एक समग्र शहरी विकास परियोजना के रूप में तैयार किया जाए। इसके लिए संबंधित विभागों और हितधारकों से सुझाव लेकर अंतिम योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।












